सोचो कितना आनंद आएगा इससे हमारी खुशियों में चार चांद तो लगेंगे ही स पक्षी भी चैन की सा सोचो कितना आनंद आएगा इससे हमारी खुशियों में चार चांद तो लगेंगे ही स पक्षी भी चैन...
जाओ मेरे बच्चों, भरो अपनी उड़ान, कर लो मंज़िल को फतह। जाओ मेरे बच्चों, भरो अपनी उड़ान, कर लो मंज़िल को फतह।
सोचा अब जाकर पंतगों की तरह मेरी जिन्दगी ने भी उड़ान भरनी शुरू कर दी। सोचा अब जाकर पंतगों की तरह मेरी जिन्दगी ने भी उड़ान भरनी शुरू कर दी।
अपनी कमाई से पूरा खर्च चलाती है और उन के भी सपनों को साकार कर रही है। अपनी कमाई से पूरा खर्च चलाती है और उन के भी सपनों को साकार कर रही है।
उड़ने के उसके पंख नहीं फिर भी ऊंची उड़ान बड़ी। उड़ने के उसके पंख नहीं फिर भी ऊंची उड़ान बड़ी।
पर एक सुबह पाखी की ख्वाहिशें अधूरी दस्तान में सिमट सी गयी पर एक सुबह पाखी की ख्वाहिशें अधूरी दस्तान में सिमट सी गयी